Traill's Pass expedition 2016

Route : Loharkhet - Khati - Furkia - Sura Kharak - Takhta Kharak - Trail Pass - Lwan Glacier - Martoli - Munsiyari
Time : September - October 2016
Submitted By : Pramod Kala
पर्वतारोहण व पथारोहण का सही संगम है ट्रैल्स पास और उत्तराखंड के कुछ दुर्गम मार्गों में से है यह एक | अभियान शुरू करने से लगभग दो सप्ताह पूर्व गाइड की तलाश में कपकोट तक नेगी जी और राजू भाई के साथ गया, गोविन्द जो लोहारखेत का रहने वाला था के साथ अंतिम तय्यारियों की वार्ता के बाद दूसरे दिन वापस कोटद्वार पहुंचा | राजकीय कर्मचारियों को ऐसे अभियानों में जाने हेतु विशेष आकस्मिक अवकाश के शाशनादेश से अवकाश लेना आसान रहा अतः निर्धारित तिथि २५.०९.२०१६ को कार में क्षमता से अधिक सामान भरकर राजू भाई, चौरसिया जी, रवि और में शाम तक नई टिहरी साथी ट्रेकर श्री सूरी राणा जी के होटल में पहुंचे, वहीँ सहयात्री मित्रों से परिचय हुआ | देर शाम देर शाम तक ग्रुप लीडर श्री नेगी जी द्वारा अभियान के विषय में जानकारी एवं कार्यों का विभाजन भी किया गया जिसका बाद में पालन नहीं हो पाया |
२६.०९.२०१६, सुबह जल्दी ही फ्लैग ऑफ का कार्यक्रम माननीय पर्यटन मंत्री उत्तराखंड श्री दिनेश धनै द्वारा संपन्न होना था सो सुबह समय पर फ्लैग ऑफ कार्यक्रम समापन कर प्रस्थान किया | श्रीनगर में लोकेश से कुछ जरुरी सामान लेकरए बागेश्वर कपकोट से आगे विकट रास्तों से गुजरते हुए देर रात तक लोहारखेत KMVN के TRH में पहुंचे | समय काफी हो गया था फिर भी गोविन्द द्वारा अच्छी व्यवस्था की गयी थी | पर्यटन मंत्रालय से हमारे यहाँ आने की पूर्व जानकारी दे दी गया थी अतः निःशुल्क रहने की आसान व्यवस्था हो गयी | रात को खाने और सोने की अच्छी व्यवस्था हुई तो सफर की थकान का पता नहीं चला |

२७.०९.२०१६, टिहरी से यहाँ तक जो टैक्सियां हमारे साथ आयी थी वो विकट रास्ते के डर से सुबह ही हिसाब लेकर वापस हो गयी तो यहाँ से लोकल टैक्सी की गयी | सुबह के अच्छे नास्ते के बीच नजदीक गांव से हमारा गाइड नरेश पहुँच गया | उसके आत्मविश्वाश को देख कर लग रहा था की माउंटेनियरिंग के क्षेत्र में उसे अच्छा अनुभव है, चूँकि ट्रेल पास को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले बहुत ही कम ग्रुप हैं अतः गाइड की उपलब्धता भी न्यून ही है | इस अभियान की सभी तैयारियों को अंतिम रूप देते हुए दल टैक्सी में अंतिम रोड हेड खरकिया पहुंचा यहाँ २-३ चाय खाने की छोटी दुकाने हैं | ५ किमी के आसान ट्रेक के बाद खाती गांव पहुंचे | दुर्गम पहाड़ के हिसाब से कुछ बड़ा गांव | ५०-६० परिवारों का एक सुन्दर सा गांव है | यहाँ पर बिजली के अतिरिक्त लगभग सभी सुविधाएं हैं | इंटर कॉलेज, KMVN का TRH, PWD गेस्ट हाउस, VET हॉस्पिटल आदि | रात PWD रेस्ट हाउस में रुके, यहाँ से कुछ राशन, सब्जी, एवं केरोसिन आयल लेना पड़ा क्योंकि आगे और आवस्यकता पड़ सकती थी |

२८.०९.२०१६, सुबह ही नाश्ता कर चलना शुरू किया, खूबसूरत जंगल एवं अच्छा रास्ता, कुछ चढ़ाई लेकिन ठीक ठाक | पिंडर नदी के किनारे - किनारे लगभग १४ किमी चलने के बाद द्वाली पहुंचे | काफनी की और से आने वाली नदी और पिंडर नदी के संगम पर स्थित है द्वाली, जहाँ KMVN का TRH और PWD का गेस्ट हाउस है, एक चाय और खाने का ढाबा भी है | २०१३ की आपदा में नदी तटों को काफी नुकसान पहुंचा है इसलिए पुराने रास्तों को नए स्थलों पर शिफ्ट किया गया है | लकड़ी के अस्थाई पुलों को पार कर पहुंचे KMVN TRH में, यहां भी खाना सहयोगियों द्वारा अच्छा बनाया गया था | शाम को देर तक लकड़ी के अलाव जलाकर कर एन्जॉय किया |
२९.०९.२०१६, द्वाली तक घनी वनस्पतियां और जॅंगल है, रास्ता भी सही बना हुआ है | यहाँ एक बैंगलोर का ग्रुप मिला जो पिंडारी ग्लेशियर से वापस आ रहा था | यहाँ बेड में सोने की आखिरी रात थी | सुबह नाश्ता कर ट्रेक शुरू, ५ किमी बाद फुरकिया, यहाँ भी TRH है, एक चाय / खाने की छोटी सी दुकान है जिसे ग्राहक भी शायद कभी-कभी काफी दिनों के बाद दिखता होगा | यहाँ पर हल्का सा चाय - नाश्ता कर आगे बढे | यह स्थान पिंडारी ग्लेशियर पर आने वाले पर्यटकों का बेस कैंप है अतः पर्यटकों की आवाजाही सीजन में तो बनी ही रहती है | कुछ ऊँचे - नीचे रास्ते से होकर पिंडारी बाबा के आश्रम से कुछ पहले पिंडर नदी क्रॉस करनी है | टीम लीडर द्वारा सही स्थान के चयन के बाद नदी पार की गयी मगर पानी की ठंडक रोंगटे कड़ी कर गयी | थोड़ा चढ़ाई के बाद पिंडर नदी के दाहिने किनारे पर सुन्दर पिंडारी बेस कैंप में रात्रि विश्राम किया गया | आज पहली बार टेंट प्रयोग किये गए |

३०.०९.२०१६, रात भर बारिस के बाद सुबह मौसम खुला मिला, और नाश्ते के बाद चलना शुरू किया | शुरुवात बोल्डर से हुई लेकिन थोड़ी देर बार बुग्याल में कड़ी चढ़ाई चढ़नी है | रास्ता छोटा लेकिन दुर्गम चढ़ाई, सिर्फ ६ किमी चलने में ही काफी समय लग गया | बड़ी - बड़ी घास को पकड़ कर रेंगते हुए खोलद्या खर्क पहुंचे (4160 mts) | अधिकांश का मानना था कि रात्रि विश्राम कर लिया जाये और यही किया गया क्योंकि हम लगातार हाइट गेन कर रहे थे अतः acclimatize होने के लिए इस तरह holt करना जरुरी था | हमारे कुक शंकर ने शाम का नाश्ता व रात का अच्छा खाना बनाया | इन सभी स्थानों पर मौसम ने बहुत साथ दिया |
०१.१०.२०१६, आगे का रास्ता अति दुर्गम होने लगा था, वनस्पति कम होने लगी और नंगे पहाड़ों पर चढ़ाई करनी है | दल पुरे उत्साह के साथ अगले पड़ाव कि ओर सुबह चलने लगा | यहाँ ग्लेशियर से निकलने वाले नाले को पार करने में समाय लगा, उसके बाद कड़ी चढ़ाई, अब एक-एक कदम बढ़ाना कठिन होता जा रहा था | सुबह से लगभग ५ किमी चलकर सूर्या कैंप (4480 mts) पहुंचे | रमणीक स्थान पर कैंप किया, यह स्थान पिंडारी जीरो पॉइंट के काफी ऊपर है | यह आखिरी कैंप है जहाँ मिटटी - पत्थर के ऊपर कैंप करना है, समय पर कैंपिंग हो गयी | कुछ पोर्टर्स जिन्हे लोहारखेत से लाये थे वापस चले गए, उन्हें अधिक ऊंचाई पर चलने का अनुभव नहीं था अतः आगे चलने में असमर्थता व्यक्त की | दिन मे समय पर कैंप लग गया था और मौसम भी साफ था अतः कुछ सामान की लोड फेरी का निर्णय लिया गया | कुछ साथी और पोर्टर्स सामान लेकर अगले कैंप की और बढे ताकि अगले दिन के लिए कुछ सामान कम रहे, रास्ते में सामान को सुरक्षित स्थान पर रखकर वापस हो गए, तब तक उनके लिए गर्म नाश्ता तैयार कर दिया गया | मौसम पूरी तरह से साथ दे रहा था और यहाँ से अगले कैंप के दुर्गम रास्ते का अनुमान लग रहा था |

०२.१०.२०१६, गाँधी जयंती - दल के सदस्यों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया | राष्ट्र गान और देश भक्ति के नारों के पश्चात अच्छा नाश्ता किया गया, दल नायक श्री नेगी जी द्वारा सबकी कुशल क्षेम पूछने के बाद आगे के रास्ते हेतु आवश्यक निर्देश दिए गए | यहाँ से लगतार चढ़ाई व कहीं - कहीं पर डरा देने वाला भूभाग था | आज कम दुरी तय करनी थी लेकिन कठिन एवं तकनीकी चढ़ाई थी | कैंप पहुँचने से पहले लगभग १०० mts रॉक क्लाइम्बिंग करनी थी, यहाँ पर रोप फिक्स थी अतः कुछ सहारा लेते हुए तख्ता कैंप (5078 mts) पहुंचे | पूरी तरह से बर्फ से ढकी कैंप साइट में टेंट फिक्स किये | जगह काफी कम थी अतः एक दूसरे से सटाकर टेंट पिच किये गए | किचन के लिए पुराने क्लाइम्बर द्वारा बनाई गयी पत्थर की संरचना काफी काम आयी, नजदीक ही पानी भी मिल गया | यहाँ पर हमें २ रात रुकना था, यहाँ मौसम आँख मिचौली करता रहा |यहाँ से दूर स्नो फील्ड के बाद वह रॉक वाल दिखाई दे रही थी जिसे पर करने के बाद ही ट्रेल पास की तरफ बढ़ा जा सकता था | यह इस अभियान की पहली बड़ी चुनती है और यही वो स्थान है जहाँ से अधिकांश दल अभियान समाप्त कर वापस लौट जाते हैं |
०३.१०.२०१६, आज का दिन मन, मस्तिष्क और शरीर को आगे बढ़ने के लिए तैयार करने का दिन था | सुबह से ही तय कार्यक्रम के अनुसार दल नायक श्री नेगी जी और कुछ सदस्य आवश्यक क्लाइम्बिंग टूल्स के साथ रॉक वाल की ओर बढे और शेष कैंप में ही आगे की तैयारी करते रहे | बादलों की लुका छुपी के बीच रॉक वाल पर साथी लोग कभी-कभी ही दिख पा रहे थे | कुछ समय के बाद कैंप से गरम चाय पानी लेकर कुछ साथी व पोर्टर एडवांस पार्टी की मदद हेतु गए और शाम तक सभी वापस आ गए | यहाँ से आगे वही सामान लेकर जाना था जो अति आवश्यक हो अतः सामान की छटनी भी की गयी तथा रॉक तक पहुँचना और उसे क्लाइंब करने की कठनाइयों पर भी चर्चा की गयी |

०४.१०.२०१६, अभी तक सकुशल चल रहे अभियान में दिक्कत आ गयी | पिछले दिन जो पोर्टर्स रॉक पर रोप फिक्स करने वाली पार्टी के साथ मदद के लिए गए थे उन्होंने वापस आकर अन्य साथियों को भी आगे के रास्ते के खतरे के बारे में बता दिया, अतः ३-४ कमजोर दिल वाले पोर्टर्स ने आगे बढ़ने से इंकार कर दिया | किसी तरह उन्हें समझा बुझा कर आगे चले हेतु राजी कर लिया गया | इसी दौरान नाश्ता भी कर लिया गया मगर चलने में कुछ देर हो ही गयी | यहाँ से पूरा रास्ता ग्लेशियर में था, क्रेवास भी पर करने थे, फिर रॉक वाल की जड़ पर पहुंचे | लूस रॉक के लगभग ५०० मीटर की वाल पर रोप फिक्स की हुई थी | प्रथम चरण में सामान को रॉक पर बांध कर फिर मेंबर्स को ऊपर चढ़ना था | रॉक वाल और ग्लेशियर के बीच में गैप था जहाँ राजू भाई का कैमरा गिर गया | बाद में पता चला की नेगी जी के द्वारा क्रेवास में उतर कर काफी मशक्कत के बाद उसे निकाल दिया गया |
शुरू में लगभग १० मीटर सामान व मेंबर्स को खींचने के बाद सभी को अपना सामान लेकर रोप से खुद को अटैच कर आगे बढ़ाना था, ऊपर से गिरते हुए पत्थरों से बचकर व नीचे से आते हुए मेंबर्स के ऊपर पत्थर न गिरे ये ध्यान रखकर पैर बचाते हुए चलना था, बहुत ही कठिन चढ़ाई थी | पूर्व में असफल रहे अभियानों का कारण शायद यही रॉक रही हो, क्योंकि सामान के साथ लूस रॉक पर चढ़ना बहुत ही खतरनाक था | बीच में एक सुरक्षित चट्टान के नीचे दल सदस्य श्रीसेमवाल बैठे हुए मिले, उनके साथ काफी देर तक सदस्यों को ऊपर आते देखता रहा | इस दौरान बारिस एवं बर्फवारी चल रही थी |देर शाम तक दल के सभी सदस्य रॉक के ऊपरी भाग में पहुँच गए, लेकिन सामान भी अभी तक पूरा नहीं पहुंचा था | देर शाम को खतरनाक रिज पर सीमित जगह पर कैंप किया (5341 mts) पूरे टेंट लगाने हेतु जगह भी नहीं थी तो हर टेंट पर क्षमता से अधिक लोग रहे | रात भर बर्फवारी होती रही और समय समय पर टेंट झड़ने पड़े और किसी तरह रात कट गयी |

०५.१०.२०१६, आज मौसम ख़राब था लेकिन पीछे छूटा अति आवश्यक सामान लाना भी अभियान पूरा करने की लिए जरुरी था, अतः गाइड नरेश कुछ सहयोगियों को साथ ले गया और केवल वो सामान ही लेकर आया जिसकी अत्यधिक जरुरत थी, शेष सामान छोड़ दिया गया | खाना और पानी भी सीमित था बस किसी तरह अभियान पूरा करना था | ये कैंप साइट बहुत ही खुबसूरत जगह पर थी | चारों ओर खूबसूरत बर्फीली चोटियां थी, अकल्पनीय ! खुले मौसम में बादलों के पार कभी - कभी ट्रेल पास, नंदा देवी, नंदा देवी ईस्ट, नंदा कोट आदिचोटियां दिखाई दे रही थी |
०६.१०.२०१६, सुबह मौसम साफ था, यहाँ से रोपअप होकर हल्की ढलान वाले स्नो फील्ड पर चले ही थे कि कोहरे ने चारों ओर पैक कर दिया और आगे के रस्ते का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया काफी इंतज़ार के बाद निर्णय लिया गया कि कैंप कर लिया जाये | आज लगभग 8 घंटे ने 1.5 किमी चलने के बाद खुले बर्फीले मैदान में कैंप किया |

०७.१०.२०१६, मौसम सुबह बहुत ही खुशनुमा था, गाइड दिशा का सही अनुमान लगाकर ट्रेल पास कि ओर ले गया | यहाँ सभी रोपअप रहे, रास्ते में क्रेवास काफी थे लेकिन खुले मौसम ने रास्ता कुछ आसान बना दिया | मेंबर्स एक साथ आगे बढे जबकि पोर्टर्स कुछ देर बाद पैकिंग करने के बाद आये | ट्रेल पास पर चढ़ने के लिए रोप फिक्स करनी पड़ी | दोपहर तक सभी सदस्य ट्रेल पास (5312 mts) पर सकुशल पहुँच गए |पूजा, मिस्ठान वितरण और फोटोग्राफी के बाद डेसेंडिंग होनी थी और उसके लिए भी लम्बी रोप फिक्स होनी थी अतः नेगी जी और नरेश द्वारा रोप फिक्स की गयी, जिसमे सबसे पहले नेगी जी द्वारा डेसेंडिंग की गयी, लगभग २०० मीटर की आइस वाल पर कुछ नई स्नो भी थी इसलिए उतरने में कठनाई हो रही थी | देर शाम अँधेरे तक ही सभी सदस्य नीचे स्नो फील्ड में उतर सके | एडवांस टीम ने टेंट पिच का दिए थे, सभी काफी थके थे लेकिन ट्रेल पास सकुशल पार करने की ख़ुशी थी |
०८.१०.२०१६,x ग्लेशियर कैंप पर सुबह मौसम साफ थाए आसपास क्रेवास की भरमार थी अतः इस फील्ड से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढने में ही काफी समय लग गया | यहाँ भी कई स्थानों पर टेक्निकल गियर्स का प्रयोग करना पड़ा | आज का टारगेट मर्तोली गांव था | रास्ते में नंदा देवी ईस्ट का काफी लम्बा प्लेन एरिया पार किया, बर्फ, ग्लेशियर अब दूर दिख रहे थे, काफी दिनों बाद हम उनसे बाहर निकले थे तो अच्छा लग रहा था | काफी चढ़ाई उतराई के रास्ते में चलते हुए देर रात तक मर्तोली गांव से काफी पहले कैंप करना पड़ा | थककर सभी निढाल हो चुके थे | इस स्थान पर लकड़ियां उपलब्ध थी काफी समय बाद आग सेकने को मिली |

०९.१०.२०१६, इस स्थान के आसपास सीजनल छानियाँ थी, यहाँ से आगे चलकर एक वीरान गांव भी मिला, ७-८ मकानों का यह गांव बंद था | कुछ चढ़ाई उतराई फिर सीधा दूर मर्तोली गांव दिख रहा था | मंदिर के ऊपर भोजपत्र का वनीकरण खूबसरत लग रहा था | यहाँ से दूर बुर्फु गांव भी दिख रहा था बहुत ही खूबसूरत | मर्तोली १५-२० मकानों का गांव है अधिकांश मकान बंद मिले लेकिन इसी गांव के एक व्यक्ति ने अपने घर पर ही पर्यटकों के लिए होटल जैसी व्यवस्था की है | हमारी एडवांस पार्टी के द्वारा सभी के लिए यहाँ पर उनकी पसंद का मीट भात बनवाया हुआ था जिसका भरपूर आनंद सभी ने लिया | यहाँ से रेलकोट कच्ची सड़क द्वारा ५ किमी दूर था | रेलकोट इस सीमा पर तैनात ITBP का बेस कैंप है, यहाँ से चीन सीमा हेतु सड़क निर्माण किया जा रहा है |रोड़ बनाने के लिए उपकरण वाहन यहाँ हवाई मार्ग से लाये गए हैं | यहाँ से मुंसियारी लगभग ६० किमी है | रात्रि विश्राम KMVN के अव्यवस्थित आवास गृह में किया | छोटी सी जगहए कम आबादी लेकिनITBP का कैंप, यहाँ से satelite फ़ोन द्वारा घर बात की गयी |
१०.१०.२०१६, रेलकोट से रास्ता कुछ सुगम था | कुछ चढ़ाई, उतराई घाटी होते हुए नाहर देवी पहुंचे, स्थानीय व्यक्ति द्वारा ढाबा खोला गया है जहाँ दोपहर का खाना खाया | इसके बाद बोगडियार गांव पहुंचे, यह भी छोटा सा गांव है | यहाँ ITBP की चैक पोस्ट है जहां पर हमारे दस्तावेज चैक हुए | आगे बढ़ते हुए नैन सिंह टॉप से कुछ नीचे छानियों में रात्रि विश्राम किया | छानियों में रहने खाने की अच्छी व्यवस्था थी, इसका उपयोग भी होटल जैसे ही किया जा रहा था |
११.२०.२०१६, सुबह अच्छे नाश्ते के बाद नैन सिंह टॉप की हल्की चढ़ाई और उसके बाद बहुत तीखी उतराई, सीमान्त गांव की और सामान ले कर जा रहे घोड़ों से बचकर चलना पड़ रहा था | लिलम गांव, मुंसियारी होते हुए रात बागेश्वर KMVN के रेस्ट हाउस में पहुंचे और १२.१०.२०१६ को बागेश्वर से श्रीनगर टैक्सी द्वारा, जहां राजू भाई ने अपनी कार मंगाई हुई थी, जिससे राजू भाई, चौरसिया जी, रवि और मैं देर रात कोटद्वार पहुंचे |

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